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Moral stories / Bodh katha - हाथी और चिड़ियाँ की कहानी

Moral stories / Bodh katha हाथी और चिड़ियाँ की कहानी  The Sparrow And The Elephant चिंदरबन के जंगल में एक पेड़ पर घोंसले में चिऊ चिड़ियाँ और उसका पति काऊ दोनों एक साथ आनंद से रहते थे। कुछ दिन के बाद चिऊ ने अंडे दे दिए। दोनों बहोत ख़ुशी में थे। एक दिन काऊ चिऊ के लिए खाने का बंदोबस्त करने गया क्योंकि चिऊ अंडे से ने के लिए बैठी, वो उठ नहीं सकती थी। वही पेड़ के निचे से एक बड़ा हाथी हररोज तालाब में पानी पिने के लिए जाता था लेकिन वह बहुत बड़ा और अड़ियल होने से अजु बाजु के पेड़ पौंधो को नुकसान पहुंचता था, तभी उसे डरकर कोई उसे बोल नहीं पता था। उस दिन वह हाथी आया और चिऊ जहाँ बैठी थी वह पेड़ पर सूंड मरकर पेड़ हिला रहा था। तब चिऊ ने उसे कहा, "ओ, हाथी भैय्या कृपा करके पेड़ को नुकसान मत पहुँचाना मेरा घोंसला और उसमे अंडे है मेरे।" हाथी और चिड़ियाँ की कहानी   उसपर हाथी को बहुत गुस्सा आया उसका अहंकार जाग उठा, और चिऊ को बोला, "तुम्हारी इतनी हिम्मत के तुम मुझे बोल रही हो, इतनी पिद्दी सी होकर भी." और ऐसा कहकर उसने वह पेड़ जो जोर से हिलाया और वहां से चला गया। लेकिन हाथी ने पेड़ हिलाया उसमे चि...

विक्रम और बेताल की कहानी - पूर्वार्ध

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विक्रम और बेताल की कहानी पूर्वार्ध  विक्रम और बैताल की कहानियाँ सदियों साल पुरानी कहानियाँ है। यह राजा विक्रमादित्य की कहानियों पर आधारित है और इसकी रचना ईसवी सन पूर्व ४९५ में कश्मीरी कवी सोमदेव द्वारा की गयी थी यह कहानियां 'बेताल पच्चीसी' भी कहलाती है ।  उज्जैन की धारा नगरी में राजा गंधर्वसेन का राज्य था। उसकी चार रानियाँ थीं और उनके छ: पुत्र थे, जो सब-के-सब बड़े ही वीर और बलवान थे। कुछ  दिन के बाद राजा की मृत्यु हो गई और उनकी जगह उनका बड़ा बेटा शंख गद्दी पर बैठा। शंख बड़ा दुर्वर्तनी था। उसे आराम और चैन की जिंदगी जीने की आदत थी।  दरबारी मंत्रीगण और प्रजा उसपर नाराज थी। उसके विलासित जीवन के कारण राज्य की स्थिति दिन-प्रतिदिन बदतर होने लगी। राजधन  घटने लगा। दुश्मनों की नजरें राज्य पर पड़ने लगी। प्रजा के साथ ही सभी मंत्रीगण चाहते थे कि विक्रम राजा बने। विक्रम से भी राज्य की दुर्दशा देखी नही जाती थी। सभी लोग विक्रम के साथ थे। शंख ने कुछ दिन राज किया, उसके बाद विक्रम ने मजबूर होकर उसे मार डाला और वहां का राजा बन बैठा। उसका राज्य दिनोंदिन बढ़ता गया और वह सारे जम्बूद्...